गिलोय एक जड़ी-बूटी वाली बेल है जो मेनिस्पर्मेसी परिवार से संबंधित है। इसे अमृता, गुडूची, और हार्टलीफ मूनसीड भी कहा जाता है। इसके पत्ते दिल के आकार के होते हैं।
गिलोय के पौधे भारत, म्यांमार, दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यह जड़ी-बूटी कई औषधीय गुणों से भरपूर है जो विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद करती है।
पोषण तथ्य:
फाइबर: 11.3 ग्राम
प्रोटीन: 2.3 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट्स: 3.34 ग्राम
कैल्शियम: 85.2 मिलीग्राम
आयरन: 5.8 मिलीग्राम
विटामिन A: 303.7 माइक्रोग्राम
विटामिन C: 56 मिलीग्राम
स्वास्थ्य लाभ:
गिलोय पाउडर वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करता है।
स्मृति शक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ाता है।
इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
सर्दी, खांसी और फ्लू के इलाज में सहायक है।
तनाव को कम करने में मदद करता है।
रुमेटॉयड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में लाभकारी।
त्वचा रोग जैसे कुष्ठ और खुजली के इलाज में उपयोगी।
मूत्र मार्ग संक्रमण का इलाज करता है।
छींक, नाक बंद होना और बंद नाक जैसी एलर्जी की शिकायतों से राहत दिलाता है।
गिलोय पाउडर की मात्रा:
2 से 3 चम्मच गिलोय पाउडर को पानी में मिलाकर खाली पेट सेवन करें। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और स्वास्थ्य बनाए रखता है।














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