बेल का छाल (Aegle Marmelos) रुटेसी परिवार का एक पौधा है जो दक्षिण पूर्व एशिया का मूल निवासी है। भारत में यह पवित्र वृक्ष माना जाता है और इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। इसके पत्ते, छाल, फल और बीज सभी में विभिन्न औषधीय गुण होते हैं जो कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में मदद करते हैं।
बेल छाल का काढ़ा मलेरिया के इलाज में सहायक है। इसमें मौजूद कैंसररोधी गुण कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करते हैं। कुछ पशु अध्ययनों से पता चलता है कि यह छाल टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकती है। आयुर्वेद में यह अपच और पेट में सूजन के इलाज में प्रभावी है। इसके मधुमेहरोधी गुण रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके एंटीबायोटिक गुण साँप के काटने के इलाज में भी उपयोगी हैं। बेल छाल का काढ़ा बुखार और उल्टी को ठीक करता है।
सेवन विधि: आवश्यक मात्रा में बेल छाल और ननारी जड़ को पीसकर पाउडर बनाएं। इसमें गुड़ और आधा लीटर पानी डालकर उबालें। इसे दिन में दो बार पिएं जिससे बुखार और उल्टी में राहत मिलती है।




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