मोरिंगा (सहजन) एक बहुपयोगी औषधीय पौधा है जिसे आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा में वर्षों से उपयोग किया जाता रहा है। इसका वानस्पतिक नाम Moringa Oleifera है और यह Moringaceae परिवार से संबंधित है। यह पेड़ भारत उपमहाद्वीप में पाया जाता है और इसकी पत्तियों में अत्यधिक पोषण होता है।
मोरिंगा की पत्तियाँ विटामिन A, B1, B2, B3, B6, C, फोलेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक जैसे खनिजों से भरपूर होती हैं। यह शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती हैं और अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक होती हैं।
स्वास्थ्य लाभ:
आंखों की रोशनी, प्रतिरक्षा और भ्रूण की वृद्धि के लिए लाभकारी।
आयुर्वेद व सिद्ध चिकित्सा में यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में मदद करता है।
इसमें मौजूद सूजनरोधी गुण सूजन और घाव को जल्दी ठीक करने में सहायक होते हैं।
कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और हृदय को नुकसान से बचाने में मदद करता है।
डायबिटीज़, अस्थमा, अवसाद, चिंता, थकान और लिवर संबंधी विकारों में सहायक।
इसमें उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो किडनी की विषाक्तता को कम करते हैं।
सेवन विधि:
5 ग्राम मोरिंगा पाउडर को 100 मि.ली. पानी में मिलाकर उबालें। छानकर नाश्ते से पहले सेवन करें। इसी तरह शाम के खाने के बाद भी लें। नियमित सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है।












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