भारतीय मल्लो या कंट्री मल्लो (अबुटिलोन इंडिकम) मल्वेसी परिवार का एक औषधीय जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद, सिद्ध, फोक और यूनानी चिकित्सा में इसके सभी भाग जैसे जड़, फूल, छाल और बीज का उपयोग विभिन्न रोगों के इलाज में किया जाता है।
भारतीय मल्लो की पत्तियों में जीवाणुरोधी, सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, कैंसररोधी और लीवर संरक्षक गुण होते हैं।
इसे चीनी बेलफ्लावर, कंट्री मल्लो, इंडियन अबुटिलोन, इंडियन लैंटर्न प्लांट, मंकी बुश, मून फ्लावर और ट्वेल्व ओ’क्लॉक फ्लावर के नामों से भी जाना जाता है।
स्वास्थ्य लाभ:
लकवे और रक्तस्राव संबंधी विकारों के इलाज में मदद करता है।
तंत्रिका संबंधी समस्याओं में लाभकारी।
सर्दी और बुखार के घरेलू उपचार में उपयोगी।
दस्त के इलाज में सहायक।
जीवाणुरोधी गुणों के कारण जख्मों की सूजन, संक्रमण और दर्द कम करता है।
बवासीर के उपचार में मददगार।
मसूड़ों से खून आना और दांत दर्द को कम करता है।
मूत्रविकारों के इलाज में सहायक।
यकृत रोग, पीलिया और मूत्राशय संक्रमण में लाभकारी।
कोढ़, अल्सर और सिरदर्द के उपचार में उपयोगी।
सेवन विधि:
आंतरिक उपयोग: 5 ग्राम भारतीय मल्लो पाउडर को 100 मिली पानी में मिलाकर कुछ मिनट उबालें। छानकर नाश्ते से पहले पिएं। रात के खाने के बाद यह दवा दोहराएं।
बाहरी उपयोग: आवश्यक मात्रा में पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और जख्म पर लगाएं।
दांत दर्द के इलाज के लिए 100 मिली पानी में पाउडर मिलाकर कुल्ला करें।












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