Cassia Auriculata, जिसे हिंदी में तरवाड़ फूल कहा जाता है, एक सदाबहार झाड़ी है जो भारत के विभिन्न हिस्सों में पाई जाती है। इस पौधे के फूल, पत्ते, जड़ें, तने और फल – सभी हिस्से आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं। इसे आयुर्वेद में त्वचा रोगों, मूत्र संबंधी समस्याओं और रक्त शर्करा के नियंत्रण के लिए एक प्रभावी औषधि माना जाता है।
पोषण तत्व (प्रति 100 ग्राम):
कैलोरी: 300
वसा: 4 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट: 48 ग्राम
फाइबर: 16 ग्राम
प्रोटीन: 18 ग्राम
कैल्शियम: 158.4 मिग्रा
आयरन: 42.4 मिग्रा
स्वास्थ्य लाभ:
असमान त्वचा, काले धब्बे और झाइयों को दूर करता है।
शरीर की दुर्गंध को कम करता है और त्वचा संक्रमण से बचाव करता है।
शरीर में इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।
गठिया और संधिशोथ (गाउट) में राहत प्रदान करता है।
शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है।
रक्त में शुगर लेवल को संतुलित करता है।
इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण सूजन, नेत्र रोग और गोनोरिया में सहायक होते हैं।
यह जिगर के कार्य को बेहतर बनाने में सहायक है।
सेवन विधि:
5 ग्राम सूखे तरवाड़ फूल पाउडर को 100 मि.ली. पानी में मिलाकर कुछ मिनट तक उबालें। गुनगुना होने पर छान लें। इसे भोजन से पहले दिन में दो बार सेवन करें। यह अत्यधिक मूत्रत्याग की समस्या में उपयोगी है।













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