Cyperus rotundus जिसे हिंदी में नागरमोथा या मोठा कहा जाता है, एक बारहमासी औषधीय पौधा है जो मुख्य रूप से गीले इलाकों में पाया जाता है। यह पौधा सिद्ध और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्राचीन काल से उपयोग किया जाता रहा है। इसकी जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं और विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज में सहायक होती हैं।
इसकी खुशबू के कारण इसका उपयोग औषधीय लेपों और तेलों में भी किया जाता है। इसे कोको-घास, जावा घास, पर्पल नटसेज और रेड नटसेज जैसे नामों से भी जाना जाता है।
स्वास्थ्य लाभ:
सूखी मोठा जड़ का उपयोग सभी प्रकार के बुखार, विशेषकर मलेरिया के इलाज में किया जाता है।
इसके अर्क से जोड़ों और मांसपेशियों की सूजन को कम किया जा सकता है।
पाचन समस्याओं में यह अत्यंत उपयोगी है।
आँखों से संबंधित समस्याओं के उपचार में भी कारगर है।
अस्थमा और खांसी जैसे श्वसन रोगों में राहत देता है।
याददाश्त बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और ताकत प्रदान करता है।
इसका लेप त्वचा रोगों और फंगल संक्रमण में उपयोगी होता है।
सेवन विधि:
5 ग्राम सूखी मोठा जड़ को पीसकर पाउडर बना लें।
इसमें एक चम्मच जीरा पाउडर, सूखा अदरक और पानी मिलाएं।
इसे कुछ मिनट तक उबालें।
छानकर दिन में दो बार पिएं।
नियमित सेवन से बुखार में राहत मिलती है।
नोट:
यह उत्पाद 100% प्राकृतिक, रसायन मुक्त, बिना किसी रंग या परिरक्षक के तैयार किया गया है। इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।














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