कोलेअस की जड़ (Plectranthus barbatus) जिसे आयुर्वेद में पाषाणभेदी या विलामिचाई वेर के नाम से जाना जाता है, लैमिएसी (Lamiaceae) परिवार की सदस्य है जिसे सामान्यतः “पुदीना परिवार” कहा जाता है। इसकी जड़ें सुगंधित होती हैं और इनमें आवश्यक तेलों की प्रचुरता होती है, जिससे इसकी गंध कपूर जैसी महसूस होती है।
यह बहुवर्षीय जड़ी-बूटी केवल सुगंध ही नहीं बल्कि कई औषधीय गुणों से भी भरपूर होती है, जो परंपरागत चिकित्सा में उपयोगी मानी जाती है।
स्वास्थ्य लाभ:
कोलेअस जड़ एलर्जी के उपचार में सहायक होती है।
यह चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS) के लक्षणों को कम करने में उपयोगी है।
यह रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में सहायक जड़ी-बूटी के रूप में प्रयुक्त होती है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक है।
त्वचा की सेहत बनाए रखने में मददगार है।














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