अनंतमूल, जिसे नन्नारी के नाम से भी जाना जाता है, का वैज्ञानिक नाम Hemidesmus indicus है और यह Apocynaceae परिवार से संबंधित है। यह अर्द्ध-सीधा बढ़ने वाला पौधा दक्षिण अमेरिका, मैक्सिको, कैरेबियन, जमैका और भारत में पाया जाता है। भारत में विशेषकर दक्षिण भारत में इसके जड़ का उपयोग गर्मियों में ठंडे पेय (शरबत) बनाने में किया जाता है।
इस जड़ी-बूटी का स्वाद सुगंधित होता है और यह शरीर को ठंडक देने के लिए आयुर्वेद में प्रसिद्ध है। इसकी जड़ से बने अर्क का उपयोग अचार और चावल के व्यंजनों के साथ भी किया जाता है।
स्वास्थ्य लाभ:
शरीर को ठंडक प्रदान करता है और रक्त को शुद्ध करता है।
लोक चिकित्सा में इसे कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी माना जाता है।
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा रोग जैसे डर्मेटाइटिस, एक्जिमा और सोरायसिस के इलाज में सहायक होते हैं।
त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने में सहायक।
यकृत और गुर्दे के रोगों के उपचार में लाभकारी।
रुमेटाइड गठिया जैसी सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज में सहायक।
मूत्र संक्रमण के इलाज में नन्नारी जूस प्रभावी होता है।
सेवन विधि:
5 ग्राम सूखी नन्नारी जड़ का पाउडर 100 मि.ली. पानी में मिलाकर कुछ मिनट तक उबालें। छानकर भोजन से पहले दिन में दो बार सेवन करें। यह गुर्दे और यकृत के लिए फायदेमंद है।













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