सरसपरीला रूट पाउडर का वैज्ञानिक नाम Hemidesmus Indicus है। इसे नन्नारी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक औषधीय पौधा है जो पारंपरिक हर्बल चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। सरसपरीला की जड़ में फ्लावोनोइड्स की अच्छी मात्रा होती है जो यकृत (लीवर) की सुरक्षा करती है। हाल के शोधों में पाया गया है कि इसमें कैंसररोधी गुण भी हैं, जो कैंसर के उपचार में सहायक हो सकते हैं। नन्नारी जड़ मूत्रवर्धक (डाययूरेटिक) गुण रखती है जो मूत्र त्याग को बढ़ावा देती है। यह सूजनरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुणों से भरपूर है, जिससे गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है। इसके अलावा, यह सोरायसिस और अन्य त्वचा रोगों के उपचार में मददगार है। नन्नारी जड़ प्रजनन क्षमता बढ़ाने और पुरुषों एवं महिलाओं दोनों में यौन इच्छा को बढ़ावा देने में सहायक होती है। इसके अर्क का उपयोग गाउट और मेटाबोलिक सिंड्रोम के उपचार में भी किया जाता है।
खुराक:
5 ग्राम सरसपरीला रूट पाउडर को 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कुछ मिनट तक उबालें। छानकर भोजन से पहले दिन में दो बार सेवन करें। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।













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